लाल मिर्च और परी की कहानी – Pari ki Kahani

Kisan aur Pari ki Kahani : एक किसान था और उसका एक बेटा था |

किसान अपने खेत में तरह-तरह की फसल उगाता था और उन्हें अच्छे दामों में बेच देता था |

एक दिन उसने खेत में लाल मिर्च की फसल उगाई लाल मिर्च जब पक कर तैयार हुई तब बाप बेटे बारी-बारी से दोनों खेत की रखवाली करते, किसान दिन के समय रखवाली करता और बेटा रात के समय रखवाली करता उस मिर्च के खेत में एक मिर्च बहुत बड़ी थी उसका आकार 5 फुट था |

दोनों को सबसे ज्यादा उसी मिर्च की चिंता थी कि कहीं कोई जानवर उसे खराब ना कर दे |

उनको यह भी चिंता थी की कोई चोर उसे चुरा ना ले क्योंकि जो भी आता उन सबकी नजरें बड़ी वाली मिर्च पर ही पढ़ती थी |वह देखने में बहुत ही अद्भुत थी |

एक दिन किसान का बेटा अपने खेत में पहरा दे रहा था तभी उसने देखा आसमान में थोड़ा उजाला हुआ |

आसमान में से एक उड़न खटोला उत्तरा अब उस किसान का बेटा है घबरा गया और डर के मारे घनी झाड़ियों में जाकर छिप गया |
बह इतना डर गया था की उसको यह भी डर नहीं लगा कि कोई सांप बिच्छू से डंक ना मार ले |

उसने देखा ढेर सारी परियां उड़न खटोले से उतरी खाली जगह देखकर सारी परियों ने वहां पर एक सफेद चादर बिछाई तरह-तरह के संगीत बजने लगे चारों तरफ रंग बिरंगा उजाला हो गया |

सारी परिया नाचने गाने लगी किसान का बेटा झाड़ियों के पीछे से छिपकर यह सारा नजारा देख रहा था अचानक उसने देखा लाल मिर्च के खेत में अचानक रोशनी हुई और बड़ी लाल मिर्च में से एक लालपरी निकली वह बड़ी ही सुंदर थी फिर वह लाल परी अपनी सभी परी सहेलियों के साथ नाचने गाने लगी |

किसान का बेटा सारी रात की तमाशा देखता रहा जैसे ही सुबह के 4:00 बजे बाकी की सभी परियां अपना सारा सामान जल्दी-जल्दी समेट कर उड़न खटोले में बैठ गई और आसमान में चली गई |

लालपरी वापस उसी लाल मिर्च में जाकर छिप गई किसान के बेटे को लगा कि वह कोई सपना देख रहा है वह उठा और धीरे-धीरे घर की तरफ चल दिया उस दिन वह घर आकर पूरा दिन सोया रहा क्योंकि रात को फिर से पहरा देना था |

अब तो वह हर रोज रात होने की प्रतीक्षा करता था खेत पर जाकर झाड़ियों में छिप जाता था |

प्रतिदिन यही नजारा देखता ऐसा करते-करते लगभग एक महीना बीत गया |

एक दिन किसान के बेटे के मन में एक विचार आया वह शाम को खेत में गया और बड़े आराम से बड़ी मिर्च को तोड़ लिया और घर आकर तबीयत खराब होने का बहाना बना लिया और घर की छत पर आकर लाल मिर्च को छत पर रख दिया और वापस अंदर आकर उसने आग जलाई |

 

जैसे ही रात की 12:00 अचानक छत पर उजाला हुआ उड़न खटोला उत्तरा फिर जैसा खेत में होता था वही सब छत पर होने लगा मिर्च में से लालपरी निकली और बाकी सभी परियों के साथ नाचने गाने में मस्त हो गई तभी किसान के बेटे ने मौके का फायदा उठाया और जाकर मिर्च को उठाकर अंदर ले आया |

कमरे में लाकर मिर्च को उसने आग में फेंक दिया और मिर्च जलकर राख हो गई फिर वह सुबह होने का इंतजार करने लगा कि कब सुबह होगी और लालपरी अपनी मिर्च को ढूंढेगी

फिर क्या होगा यही सब सोचकर किसान का बेटा घबरा रहा था सुबह के 4:00 बजते ही सभी परियां अपना सामान समेटने लगी सारी परिया उड़न खटोले में बैठकर आसमान में चली गई |

लाल परी अपने मिर्च ढूंढने लगी पर उसे वह कहीं नहीं मिली एक किसान का बेटा कमरे से बाहर आया उसने लाल परी का हाथ पकड़ा और बोला तुम जो ढूंढ रही हो वह तो आग में जलकर खाक हो गई|

परी ने बड़े आश्चर्य से उसकी तरफ देखा और कहा अब क्या होगा,मैं क्या करूं? कहां जाऊं? किसान के बेटे ने कहा लालपरी मैं तो एक महीने से तुम सब को देख रहा हूं |

मैं तुमसे प्रेम करने लगा हूं क्या तुम मुझसे विवाह करोगी ?

यह सुनकर परी का चेहरा चमक उठा और उसने हां कर दी

 

फिर उसने बताया कि एक बार उससे कोई गलती हो गई थी जिसकी वजह से उसे मिर्च के अंदर रहने का श्राप मिला

लेकिन जिस महात्मा ने श्राप दिया था उसने मुझे मुक्ति का उपाय भी बताया था कि जब कोई परिश्रमी और खूबसूरत नौजवान तुम्हारी इस मिर्च को आग में जला देगा तब तुम श्राप मुक्त हो जाओगी

इस तरह लालपरी से किसान का बेटा शादी कर लेता है और मैं खुशी-खुशी अपना जीवन यापन करते हैं |

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